खरमास हुआ शुरू, नहीं होंगे मांगलिक कार्य -आचार्य सत्येंद्र पाठक।
पतरातु। खरमास 16 दिसंबर को अपराह्न 1 बजकर 50 मिनट से शुरू हो गया है। जो 14 जनवरी 2026 के रात को समाप्त होगा। इस संबंध में पतरातू निवासी और प्रसिद्ध आचार्य सत्येंद्र पाठक ने आजाद सिपाही संवाददाता को बताया कि यह खरमास तब शुरू होता है, जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते है। इस राशि में सूर्य अत्यधिक कमजोर स्थिति में होते है। यही कारण है कि इस करीब एक महीने के कालखंड में मांगलिक कार्य, तथा विवाह और विवाह से जुड़े छेका, तिलक आदि मांगलिक कार्य वर्जित है। इसके अतिरिक्त मुंडन, यज्ञोपवीत, गृह निर्माण के लिए भूमि पूजन, गृहप्रवेश, वाहन की खरीददारी, घर खरीदना, सोना, चांदी आदि महंगे धातुओं की क्रय, नया व्यवसाय शुरू करना आदि वर्जित रहते है। परंतु इस कालखंड में अपने आध्यात्मिक उन्नति के लिए पूजा पाठ, मंत्र या देवी देवताओं के नाम जाप आदि किए जाते है। किसी जरूरतमंद को या फिर मंदिरों में दान देना आदि कार्य किए जा सकते है। वही भागवत गीता पाठ सहित पुराणों का पाठ करना और करवाना इस समय विशेष फलदाई सिद्ध होता है। इस काल में भगवान भुवन भास्कर सूर्य को स्नान के बाद जल देना अत्यंत शुभकारी परिणाम देता है। इसलिए सूर्य को अर्घ्य जरूर देना चाहिए। इस कालखंड में वैसा कार्य जो पहले से किया जा रहा है। और बीच में खरमास आ गया वैसे कार्य को जारी रखा जा सकता है। वही खरमास में बच्चों के अन्नप्राशन पर भी रोक नहीं है। बहुत सारे विद्वानों का मत है कि अगर प्रेम विवाह करना है तो खरमास में भी किया जा सकता है।









