हासा-भाषा विजय दिवस पर आदिवासी सेंगेल अभियान ने निकाली रैली

आदिवासी सेंगेल अभियान की ओर से सोमवार को हासा-भाषा (मातृभूमि-मातृभाषा) विजय दिवस के अवसर पर जनजागरण मोटर साइकिल रैली निकाली गई। रैली जिले के महेशपुर, पाकुड़िया और अमड़ापड़ा में निकाली गई। जिसकी अध्यक्षता पाकुड़ सेंगेल अध्यक्ष लोबीन मरांडी ने किया। रैली में साहेबगंज जोनल हेड सोनातन हेम्ब्रम ने कहा कि आज का दिन आदिवासी समाज के लिए महान ऐतिहासिक गर्व का दिन है। 30 जून 1855 को हुए संताल हूल का परिणाम 22 दिसंबर 1855 को संताल परगना दिशोम (एसपीटी कानून) के रूप में मिला। इसी तरह सालखन मुर्मू के नेतृत्व में 30 जून 2000 को संताली भाषा मोर्चा के द्वारा संताली भाषा को राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने के लिए शपथ लिया गया था। जिसका परिणाम 22 दिसंबर 2003 को संताली भाषा को राष्ट्रीय मान्यता के रूप में मिला। इस अवसर पर मांग की गई कि इस दिन को झारखंड सरकार हासा-भाषा विजय दिवस के रूप में मनाए और आदिवासियों के इस गौरवशाली इतिहास को स्थापित करे। इसके लिए आदिवासी सेंगेल अभियान की तरफ से राज्यपाल झारखंड को एक पत्र भी प्रेषित किया गया है। राष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सबसे बड़ी आदिवासी भाषा संताली को आदिवासी बहुल प्रदेश झारखंड में प्रथम राजभाषा का दर्जा दिया जाए। प्रकृति पूजक आदिवासियों को सरना धर्म कोड दिया जाए। मौके पर मदन मुर्मू, रूबीलाल किस्कू, सुलेमान किस्कू, रंजीत टुडू, सेकेंदर हेम्ब्रम, दिनेश सोरेन, संतलाल मुर्मू, शिबू मुर्मू, इजरायल किस्कू, फिलिप सोरेन, कोमल सोरेन, सोनाराम टुडू उपस्थित थे।

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