भागवत कथा के पांचवें दिन आदित्य पंडित जी महाराज ने किया श्री कृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन

 

पोटका प्रखंड अंतर्गत हरिणा पंचायत के नारायणपुर गांव में चल रहे सात दिवसीय मोक्षदायिनी व जीवन धन्य कर देने वाली पतित पावनी भागवत कथा यज्ञ के
पांचवें दिन की कथा में वृंदावन धाम के आदित्य पंडित जी महाराज ने कथा वाचन कर भगवान की बाल लीलाओं के चित्रण का वर्णन किया ।उन्होंने श्रोताओं से कहा की लीला और क्रिया में अंतर होती है। अभिमान तथा सुखी रहने की इच्छा क्रिया कहलाती है इसे ना तो कर्तव्य का अभिमान है और ना ही सुखी रहने की इच्छा बल्कि दूसरों को सुखी रखने की इच्छा को लीला कहते हैं भगवान श्री कृष्ण ने यही लीला की जिससे समस्त गोकुल वासी सुखी और संपन्न थे ।उन्होंने कहा की माखन चोरी करने का आशय मन की चोरी से है कन्हैया ने भक्तों के मन की चोरी की। उन्होंने तमाम बाल लीलाओं का वर्णन करते हुए उपस्थित श्रोताओं को वात्सल्य प्रेम में सराबोर कर दिया। भगवान कृष्ण के जन्म लेने पर कंस उनकी मृत्यु के लिए राज्य की सबसे बलवान राक्षसी पुतना को भेजता है राक्षसी पूतना भेष बदलकर भगवान श्री कृष्ण को अपने स्थन से जहरीला दूध पिलाने का प्रयास करती है परंतु भगवान उनका वध कर देते हैं। इसी प्रकार कार्तिक माह में बृजवासी भगवान इंद्र को प्रसन्न करने के लिए पूजन कार्यक्रम की तैयारी करते हैं परंतु भगवान कृष्ण उनको इंद्र की पूजा करने से मना कर देते हैं और गोवर्धन की पूजा करने को कहते हैं। यह बात सुनकर भगवान इंद्र नाराज हो जाते हैं और गोकुल को बहाने के लिए भारी वर्षा करते हैं इसे देखकर समस्त बृजवासी परेशान हो जाते हैं भारी वर्षा को देखकर भगवान श्री कृष्णा कनिष्ठ अंगुली पर गोवर्धन पर्वत को उठाकर सभी लोगों को उसके नीचे छिपा लेते हैं। भगवान गोवर्धन पर्वत को उठाकर लोगों को बचाने से इंद्र का घमंड चकनाचूर हो गया।
बुधवार पंचम दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के अंत में प्रसाद का वितरण नारायणपुर निवासी अंबरीश मंडल व परिवार के द्वारा किया गया तथा कथा का संचालन संयुक्त रूप से आयोजक मंडली द्वारा किया गया।

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