रश्मि मेटेलिक्स ने चकला पावर प्लांट परिसर में सैकड़ों पेड़ों पर चलाया डोजर, वन विभाग ने कहा अनुमति नहीं तो होगी कानूनी कार्रवाई
लातेहार।लातेहार जिला के
चंदवा थाना क्षेत्र स्थित चकला पावर प्लांट, जिसे अभिजीत ग्रुप के दिवालिया घोषित होने के बाद रेशमी मेटेलीक्स कंपनी उड़ीसा एलॉय) द्वारा अधिग्रहण की प्रक्रिया में लिया गया है। प्लांट में इन दिनों पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया है। बंद पड़े पावर प्लांट की बाउंड्री के अंदर सैकड़ों पेड़ों को कंपनी द्वारा डोजर से गिराए जाने की सूचना मिली है। इस घटनाक्रम से स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों में चिंता व्याप्त है।जानकारी के अनुसार, चकला स्थित पावर प्लांट लंबे समय से बंद पड़ा था। हाल ही में रेशमी मेटेलिक्स कंपनी द्वारा प्लांट का आकलन एवं पुनः संचालन की संभावनाओं को लेकर गतिविधियां शुरू गई हैं। इसी क्रम में प्लांट परिसर की सफाई और समतलीकरण का कार्य प्रारंभ किया गया। आरोप है कि इसी दौरान बाउंड्री के भीतर खड़े सैकड़ों पेड़ों को बिना स्पष्ट अनुमति के डोजर से रौंदा जा रहा है। मामले को लेकर जब चंदवा प्रभारी रेंजर नंद कुमार महतो से दूरभाष पर बात चीत में पूछा गया तो उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके कार्यालय में इस संबंध में कंपनी की ओर से किसी प्रकार का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। उन्होंने बताया, “मेरे पास कंपनी का कोई आवेदन नहीं आया है। यदि आवेदन लातेहार वन प्रमंडल कार्यालय में दिया गया होगा तो उसकी जानकारी मुझे अभी तक नहीं है। फिलहाल वनपाल को चकला प्लांट स्थल पर भेजा जा रहा है। जांच के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।”रेंजर ने आगे कहा कि यदि कंपनी द्वारा बिना वन विभाग की अनुमति के पेड़ों की कटाई या क्षति पहुंचाई गई है तो यह वन अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसी स्थिति में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि फिलहाल काम को रुकवाने का प्रयास किया जा रहा है, ताकि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की और क्षति न हो।उल्लेखनीय है कि किसी भी औद्योगिक परिसर में स्थित पेड़ों की कटाई या हटाने के लिए वन विभाग से विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होता है। विशेषकर यदि भूमि का स्वरूप वन भूमि या हरित क्षेत्र की श्रेणी में आता हो, तो संबंधित प्रावधानों का पालन करना आवश्यक है।बिना अनुमति पेड़ गिराने पर जुर्माना, क्षतिपूर्ति और आपराधिक प्रावधान लागू हो सकते हैं।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि प्लांट बंद होने के बाद वर्षों में परिसर हरियाली से भर गया था और बड़ी संख्या में पेड़-पौधे विकसित हो गए थे। अब अचानक भारी मशीनों के माध्यम से पेड़ों को हटाया जाना पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है। लोगों ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।अब देखना यह होगा कि वन विभाग की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और कंपनी ने आवश्यक अनुमति ली है या नहीं। यदि नियमों की अनदेखी साबित होती है तो संबंधित कंपनी के विरुद्ध सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।फिलहाल पूरे मामले पर वन विभाग की नजर बनी हुई है।









