पशु सखी’ बनकर अपनायी आत्मनिर्भरता की राह, गांव-गांव में घूमकर करती है पशुओ का इलाज

पाकुड़।जिले के हिरणपुर प्रखंड स्थित घाघरजानी गाँव की आदिवासी समुदाय से जुड़ी पानी टुडू ग्रामीण विकास विभाग पालश जेएसएलपीएस दुवारा संचालित सखी मंडल से जुड़ कर आजीविका पशु सखी के रूप में क़ाम कर सेवा प्रदान कर रही है.इसके साथ ही वह एक सफल किसान भी हैं। पहले पूंजी के अभाव में पति के साथ मिलकर पत्थर खादान में काम करती थी! जिससे आमदनी बहुत कम साथ में जोखिम का सामना करना पड़ता था, जिससे हमेशा बीमारी से ग्रसित रहती थी, 2021 में पानी टुडू सखी मंडल से जुड़कर बचत शुरू की, वित्तीय साक्षर हुई और सरकारी योजनाओं के बारे में भी जानने लगीं। समूह से ऋण लेकर बकरी पालन शुरू किया!पानी 2022 में पशु सखी का प्रशिक्षण लेकर पशुओं की देखभाल, टीकाकरण और कृमिनाशक दवा आदि का कार्य करने लगीं । इसके साथ उन्होंने खेती भी बढ़ाई,धान के साथ-साथ ककड़ी, करेला, लौकी, भिन्डी जैसे सब्ज़ियाँ सालों भर लगाने लगी। हाल ही में उन्होंने 11बकरो को बेचकर ₹90,000 रु कमाए की!
आज पानी टुडू सालाना ₹1 लाख से अधिक कमा रही हैं और “लखपति दीदी” बन चुकी हैं। गाँव में लोग उनसे पशुओं के टीकाकरण और रख-रखाव से जुड़ीं सलाह लेते हैं। मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से मिलने वाली सहायता राशि को वह अपने बच्चों की पढ़ाई में लगाती हैं। पानी टुडू आज आत्मनिर्भर हैं और अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन की ओर बढ़ रहीं हैं।

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