10 वर्षीय छात्र उज्जवल लोहरा की संदिग्ध मौत से मचा हड़कंप _ हॉस्टल संचालक पर घोर लापरवाही के आरोप, मुआवजा* व कड़ी कार्रवाई की मांग* डिम्पल राजा मनिका लातेहार मनिका। थाना क्षेत्र के सिंजो स्थित वीर बुद्धि भगत आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत 10 वर्षीय छात्र उज्जवल लोहरा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद परिजनों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है तथा विद्यालय प्रबंधन, विशेषकर हॉस्टल संचालक की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। मृतक छात्र की पहचान उज्जवल लोहरा (10 वर्ष), पिता बलराम लोहरा, निवासी लक्ष्मीपुर गांव, बालूमाथ प्रखंड के रूप में की गई है। उज्जवल विद्यालय के छात्रावास में रहकर पहली कक्षा में पढ़ाई कर रहा था। परिजनों के अनुसार, एक जनवरी को विद्यालय की ओर से पिकनिक का आयोजन किया गया था। इसी दौरान बच्चे की तबीयत बिगड़ने के लक्षण सामने आए, लेकिन विद्यालय प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। शुक्रवार की सुबह उज्जवल की हालत अचानक और बिगड़ गई। आरोप है कि विद्यालय संचालक सत्येंद्र यादव द्वारा न तो समय पर परिजनों को सूचना दी गई और न ही त्वरित व समुचित चिकित्सा व्यवस्था की गई, जिसके कारण बच्चे की स्थिति लगातार नाजुक होती चली गई। बाद में उसे मनिका सेवा सदन ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए लातेहार सदर अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि, इलाज में हुई देरी के चलते सदर अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई। सूचना मिलने पर परिजन सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक की मां अनीता देवी ने फूट-फूटकर रोते हुए कहा कि “अगर समय रहते हमें सूचना दी जाती और बच्चे को सही इलाज मिलता, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता। यह साफ तौर पर विद्यालय संचालक की लापरवाही से हुई मौत है।” परिजनों का आरोप है कि प्रबंधन की उदासीनता ही उज्जवल की मौत का मुख्य कारण बनी। सदर अस्पताल के चिकित्सक ने बताया कि उज्जवल के शरीर में लगभग दो ग्राम खून की कमी पाई गई थी और यदि समय पर उचित इलाज मिल जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। चिकित्सकीय बयान के बाद विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही और भी स्पष्ट होती नजर आ रही है। घटना से आक्रोशित परिजन और ग्रामीण लातेहार थाना पहुंचे, जहां विद्यालय संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। घटना की सूचना पर पंचायत समिति सदस्य धनकारा उषा देवी भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और प्रशासन से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने तथा हॉस्टल संचालक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। वहीं, अपने ऊपर लगे आरोपों पर विद्यालय संचालक सत्येंद्र यादव ने इन्हें निराधार बताते हुए सफाई दी है। हालांकि, परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सफाई सच्चाई से मुंह मोड़ने और अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास मात्र है। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और प्रबंधन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या उज्जवल को न्याय मिल पाता है या नहीं।

मनिका लातेहार मनिका। थाना क्षेत्र के सिंजो स्थित वीर बुद्धि भगत आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत 10 वर्षीय छात्र उज्जवल लोहरा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है। घटना के बाद परिजनों, ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश है तथा विद्यालय प्रबंधन, विशेषकर हॉस्टल संचालक की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
मृतक छात्र की पहचान उज्जवल लोहरा (10 वर्ष), पिता बलराम लोहरा, निवासी लक्ष्मीपुर गांव, बालूमाथ प्रखंड के रूप में की गई है। उज्जवल विद्यालय के छात्रावास में रहकर पहली कक्षा में पढ़ाई कर रहा था। परिजनों के अनुसार, एक जनवरी को विद्यालय की ओर से पिकनिक का आयोजन किया गया था। इसी दौरान बच्चे की तबीयत बिगड़ने के लक्षण सामने आए, लेकिन विद्यालय प्रबंधन ने इसे गंभीरता से नहीं लिया।
शुक्रवार की सुबह उज्जवल की हालत अचानक और बिगड़ गई। आरोप है कि विद्यालय संचालक सत्येंद्र यादव द्वारा न तो समय पर परिजनों को सूचना दी गई और न ही त्वरित व समुचित चिकित्सा व्यवस्था की गई, जिसके कारण बच्चे की स्थिति लगातार नाजुक होती चली गई। बाद में उसे मनिका सेवा सदन ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर देखते हुए लातेहार सदर अस्पताल रेफर कर दिया। हालांकि, इलाज में हुई देरी के चलते सदर अस्पताल पहुंचने के बाद इलाज के दौरान ही बच्चे की मौत हो गई।
सूचना मिलने पर परिजन सदर अस्पताल पहुंचे, जहां उनका रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक की मां अनीता देवी ने फूट-फूटकर रोते हुए कहा कि “अगर समय रहते हमें सूचना दी जाती और बच्चे को सही इलाज मिलता, तो आज मेरा बेटा जिंदा होता। यह साफ तौर पर विद्यालय संचालक की लापरवाही से हुई मौत है।” परिजनों का आरोप है कि प्रबंधन की उदासीनता ही उज्जवल की मौत का मुख्य कारण बनी।
सदर अस्पताल के चिकित्सक ने बताया कि उज्जवल के शरीर में लगभग दो ग्राम खून की कमी पाई गई थी और यदि समय पर उचित इलाज मिल जाता, तो उसकी जान बचाई जा सकती थी। चिकित्सकीय बयान के बाद विद्यालय प्रबंधन की लापरवाही और भी स्पष्ट होती नजर आ रही है।
घटना से आक्रोशित परिजन और ग्रामीण लातेहार थाना पहुंचे, जहां विद्यालय संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया जारी है। पुलिस ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पूरे मामले की गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
घटना की सूचना पर पंचायत समिति सदस्य धनकारा उषा देवी भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और प्रशासन से पीड़ित परिवार को मुआवजा देने तथा हॉस्टल संचालक के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की।
वहीं, अपने ऊपर लगे आरोपों पर विद्यालय संचालक सत्येंद्र यादव ने इन्हें निराधार बताते हुए सफाई दी है। हालांकि, परिजनों और स्थानीय लोगों का कहना है कि यह सफाई सच्चाई से मुंह मोड़ने और अपनी जिम्मेदारी से बचने का प्रयास मात्र है।
इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर आवासीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधा और प्रबंधन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में कितनी सख्ती दिखाता है और क्या उज्जवल को न्याय मिल पाता है या नहीं।

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