तेतरियाखांड़ परियोजना में दस टन कोयला स्टोक मे आग,धू-धू कर जल रहा है कोयला ________
बालूमाथ। सीसीएल की राजहरा एरिया अंतर्गत बालूमाथ प्रखण्ड स्थित तेतरियाखांड़ कोल परियोजना में उत्पादन कर स्टोक मे रखे गए दस लाख टन कोयला मे आग लगने से धु दु कर जल रही हैं। कारण पूर्व के दिनों में कोयला ट्रांसपोर्टिं मे लगे सैकड़ों ट्रकों के मालिकों द्वारा आप सनाप ट्रक भाड़ा बढ़ाऐ जाने के कारण कोयला डीस्पैच बंद रहने से सीसीएल का लाखों टन कोयला धू-धू कर जल रहा है। अब तक करीब दस लाख टन कोयला जल कर राख हो चुका है । अगर समय रहते स्टोक मे रखे कोयला ट्रकों ट्रांसपोर्टिं डीस्पैच सही तौर पर नहीं किया गया तो दस लाख टन कोयला राख होने से नहीं रोका जा सकता है।इन सबके पीछे कोयला उत्पादन का ठेका सीसीएल अधिकारियों की घोर भी लापरवाही शामने आयी है। कोयला मे पानी का छीड़काव
प्रनव नमण प्राईवेट लिमिटेड सीसीएल अधिकारियों के द्वारा नहीं कराये जाने के कारण सीसीएल की कोयले में लगे आग धधक रही है और उससे उठने वाला काला विषाक्त धुंआ पूरे क्षेत्र को प्रदूषित कर रहा है। सरकारी संपत्ति का ऐसा विध्वंस शायद ही कहीं देखने को मिलता होगा। कोल माइंस के शुरुआत के साथ ही यहां कोयले में आग लगने का सिलसिला भी शुरू हुआ है। बावजूद इसकी रोकथाम के कोई कारगर उपाय नहीं किए गए हैं। हैरत की बात यह है कि जब माइंस के पास कोयले के भंडारण और रखरखाव की सुरक्षित व्यवस्था नहीं है तो फिर कोयले के विशाल भंडारण की क्या आवश्यकता है। सूत्रों के अनुसार आश्चर्यजनक बात यह है कि झारखंड सरकार को मिलने वाली करीब साठ लाख रौयलिटी तेतरियाखांड़ परियोजना के पास आज भी बकाया बताया जा रहा है। यदि डिस्पैच और उत्पादन में समन्वय बनाकर चला जाता तो फिर सरकार के करोड़ों रुपए बर्बाद नहीं होते। माइंस में सिर्फ उत्पादन और भंडारण में दिलचस्पी ले जाती है। डिस्पैच के लिए ना ठीक सड़क है और ना ही कोयला डीस्पैच का कोई टाइम टेबल। ऐसे में उत्पादन की गति तेज है और डिस्पैच की गति सुस्त। जिसका प्रतिफल है बर्बादी? कभी आग लगा दिया जाता है तो कभी आग लग जाती है। इस बाबत राजहरा एरिया के प्रोजेक्ट महाप्रबंधक,डीस्पैच मैनेजर से बात करने का प्रयास किया गया। कई बार उनके मोबाइल पर कौल किया गया। ¨किन्तु उनका मोबाइल स्विच ऑफ आता रहा। बहरहाल तेतरियाखांड़ कि इस कुव्यवस्था से ग्रामीण आक्रोशित है।










