सरस्वती शिशु मंदिर में वनवासी बालासाहेब देशपांडे की जयंती मनी

वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड से संबद्ध शैक्षणिक इकाई श्रीहरि वनवासी विकास समिति झारखंड द्वारा संचालित विद्यालय “सरस्वती शिशु विद्या मंदिर बहरागोड़ा” में वनवासी कल्याण आश्रम के संस्थापक वनयोगी बालासाहेब देशपांडे की जन्म जयंती बड़े धूमधाम व हर्षोल्लास के साथ मनाई गई। इसी वनवासी कल्याण आश्रम के द्वारा वनवासी कल्याण केंद्र झारखंड संचालित होता है। इसके संस्थापक स्वर्गीय बालासाहेब जी ने अपना संपूर्ण जीवन वनवासी समाज के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया।
सन 1952 में उन्होंने वनवासी कल्याण आश्रम की स्थापना की। इस संस्था का उद्देश्य वनवासी समाज को शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार और आत्मनिर्भरता के माध्यम से मुख्यधारा से जोड़ना था। उन्होंने सेवा को कभी दया नहीं, बल्कि कर्तव्य माना। आज कल्याण आश्रम पूरे भारतवर्ष में शिक्षा, स्वास्थ्य, सेवा, संस्कार, धर्म आदि कुल 14 आयामों पर कार्य करता है।
बालासाहेब जी का मानना था कि “वनवासी समाज भारत की आत्मा है, और उसकी उपेक्षा राष्ट्र की कमजोरी है।”
उनके प्रयासों से आज देशभर में हजारों छात्रावास, विद्यालय, आश्रम, स्वास्थ्य केंद्र और स्वरोजगार योजनाएँ संचालित हो रही हैं। उन्होंने वनवासी समाज में आत्मसम्मान, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति की भावना को जागृत किया।
उनकी जयंती के इस पावन अवसर पर संकुल प्रधानाचार्य के साथ-साथ विद्यालय के प्रधानाचार्य श्रीमान अशोक कुमार नायक जी ने बालासाहेब जी की जीवनी पर विस्तृत प्रबोधन देते हुए कहा कि बालासाहेब देशपांडे जी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार थे —
सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति का विचार। उनकी छत्रछाया में आज सभी सरस्वती शिशु विद्या मंदिर संचालित हैं।
आचार्यों में श्रीमान राखहरि कुंडू जी, श्रीमान पार्थ सारथी साउ जी, श्रीमान दर्प नारायण बेरा जी, मानिक मान्ना जी, श्रीमती दिती मिश्र जी एवं कुछ भैया बहनों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किया।
अंत में प्रधानाचार्य श्रीमान बासुदेव प्रधान जी ने धन्यवाद ज्ञापन के साथ सभा का समापन किया।

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