कुटीर उद्योग से आत्मनिर्भरता की कहानी है 30 वर्षीय शंकर की
सरिया प्रखंड के सखुवाडीह गांव निवासी 30 वर्षीय शंकर वर्मा ने चेन्नई में कारपेंटर की नौकरी छोड़कर गांव में मिट्टी के बर्तन बनाने का काम शुरू किया और आज वे हर माह 65 हजार रुपए कमा रहे हैं।
मिट्टी के बर्तन बनाने का काम: शंकर वर्मा ने अपनी जमा पूंजी से करीब 50 हजार रुपए लगाकर मिट्टी के बर्तन में दही कटोरा, लस्सी गिलास और चाय प्याली ने दही कटोरा, लस्सी गिलास और चाय प्याली बनाने का काम शुरू किया। सोशल मीडिया के माध्यम से उन्होंने तकनीक और बाजार की जानकारी ली। आज उनके उत्पाद सरिया, बगोदर, बिरनी, धनवार, जमुआ और गिरिडीह शहर तक बिक रहे हैं।
स्वरोजगार का मॉडल:शंकर वर्मा की इस सफलता ने गांव के 9 अन्य लोगों को भी स्वरोजगार से जोड़ा है। इनमें सत्यम कुमार, गोलू वर्मा, नागेंद्र घटवार, मनोज वर्मा, विजय वर्मा और संगीता देवी के साथ तीन लोग शामिल हैं।
आत्मनिर्भरता की प्रेरणा: शंकर वर्मा की कहानी युवाओं के लिए आत्मनिर्भरता की प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि अगर इरादे मजबूत हों और काम को पूरी लगन से किया जाए, तो सफलता जरूर मिलती है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार या बैंक से थोड़ी आर्थिक सहायता मिल जाए, तो वे अपने कुटीर उद्योग का विस्तार कर सकते हैं और गांव के करीब 50 युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराया जा सकता है।









