बहरागोड़ा पॉलिटेक्निक कॉलेज में 4वीं इंटर स्कूल विज्ञान प्रदर्शनी, 55 स्कूलों ने दिखाए 74 नवाचार
बहरागोड़ा पॉलिटेक्निक कॉलेज में 4 वा इंटर स्कूल विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन किया गया.इस प्रदर्शनी में पूर्वी सिंहभूम के 55 विद्यालय ने भाग लिया.जिसमें विद्यार्थियों ने एक से बढ़कर एक अत्याधुनिक 74 विज्ञान प्रदर्शनी प्रदर्शन किया.इस विज्ञान प्रदर्शनी में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्वी सिंहभूम के डीईओ मनोज कुमार,विशिष्ट अतिथि सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ के गोपाल कृष्णा,नवोदय विद्यालय के प्रिंसिपल डॉ जनार्दन सिंह,एचओडी फिजिक्स (घाटशिला)कनाय बारीक, प्रिंसिपल डा एसके मिश्रा, सहायक प्रिंसिपल अनुराग कुमार ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया. कॉलेज परिवार की ओर से अतिथियों एवं प्रदर्शन में भाग लेने वाले विभिन्न स्कूलों के शिक्षकों को सम्मानित किया गया.
टॉप 10 में 10 स्कूल शामिल हुए पुरस्कृत
इस प्रदर्शनी में जूरी द्वारा बेहतर प्रदर्शन करने 10 स्कूल का चयन किया गया. अतिथियों के हाथों प्रथम बहरागोड़ा रामकृष्ण विवेकानंद इंटरनेशनल इंग्लिश स्कूल को 10 हजार,दूसरा बैथेल मॉडल स्कूल को 5 हजार,तीसरा उत्क्रमित उच्च विद्यालय मानुषमुड़िया को 4 हजार,चौथ झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय गुड़ाबांदा को 3100,पांचवा रामकृष्ण विवेकानंद इंटरनेशनल इंग्लिश स्कूल बहरागोड़ा को 2500, छठा बीडीएसएल सरस्वती विद्या मंदिर हाई स्कूल मुसाबनी को 2100,सातवा मॉडल स्कूल बहरागोड़ा,को 1500,आठवां बीडीएसएल सरस्वती विद्या मंदिर हाई स्कूल मुसाबनी को 1151,नौवां केजीबीवी सीएम जमशेदपुर को 1101, दसवां मनोहर लाल प्लस टू उच्च विद्यालय चाकुलिया को 1000 रु एवं ट्रॉफी देकर स्कूल को सम्मानित किया गया.
विद्यार्थियों ने दिखाई विज्ञान में अपनी प्रदर्शनी, डीईओ
डीईओ मनोज कुमार ने कहा कि इस विज्ञान प्रदर्शनी में ज्यादातर सरकारी विद्यालय के विद्यार्थी ने भाग लिया है.इसे देखकर मैं काफी प्रसन्न हूं. सभी विद्यार्थियों ने एक से एक प्रोजेक्ट सबमिट किया है. इसके लिए आप सभी बधाई के पात्र हैं. यह आप लोगों का सपना है जो आप लोग आज यहां प्रदर्शित कर रहे हैं.विज्ञान हमें नए-नए तरीका को सीखता है. बहरागोड़ा पॉलिटेक्निक कॉलेज द्वारा इस प्रकार का आयोजन काफी सराहनीय पहल है.
विज्ञान जीवन को सरल बनता हैं,साइंटिस्ट डॉ कृष्णा
सीनियर प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ कृष्णा ने कहा कि जीवन को सरल और सहज बनाता है विज्ञान का मूल उद्देश्य है. आप कल्पना करें 1900 ई में हमारा एयरलाइन नहीं था. टाटा समूह ने इसे प्रारंभ किया था आजादी के बाद भारत ने न्यूक्लियर पावर,अंतरिक्ष,जीव विज्ञान,भौतिकी लगभग सभी क्षेत्रों में तरक्की किया. विज्ञान को जीवन में उतरने की जरूरत है इसे सतत अभ्यास में जीवन को बेहतर बनाया जा सकता है.










