“देवघर में अति रुद्र महायज्ञ का दिव्य और ऐतिहासिक समापन
देवघर। आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर में आयोजित नौ दिवसीय अति रुद्र महायज्ञ एवं ज्ञान–कथा का दिव्य, भव्य और पूर्णतम समापन गुरुवार को पूर्णिमा तिथि पर अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। सर्राफ स्कूल के विस्तृत प्रांगण में स्थापित यज्ञशाला सुबह 8 बजे से ही वैदिक मंत्रों की गूंज से दैदीप्यमान हो उठी। पूर्णाहुति, भजन और महाआरती के साथ महायज्ञ का अंतिम सत्र सम्पन्न हुआ, जिसके दौरान श्रद्धालुओं का उत्साह और भक्ति का भाव अनुपम रूप में दिखाई दिया।
संतों की उपस्थिति ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
समापन अवसर पर स्वामी हरिहरानंद आनंद सरस्वती जी महाराज तथा आचार्य महामंडलेश्वर विवेकानंद भारती जी ने भगवान भोलेनाथ की असीम कृपा का आह्वान करते हुए कहा कि “अति रुद्र महायज्ञ अपनी संपूर्णता में सफल हुआ, इसका श्रेय देवघर की पावन भूमि, यहां के श्रद्धालुओं और समर्पित आयोजकों को जाता है।”
दोनों संतों ने देश–विदेश से आए श्रद्धालुओं के प्रति विशेष आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतने विशाल स्तर पर भी भक्तों का अनुशासन और निष्ठा अद्वितीय है। उन्होंने कहा कि यज्ञ में शामिल होना शिव–सेवा और लोक–कल्याण का साक्षात रूप है।
कथा वाचक रमाकांत भाई का विशेष उद्बोधन
कथा वाचक रमाकांत भाई ने देवघर की जनता की सराहना करते हुए कहा—
“देवघर के श्रद्धालुओं में जितना धैर्य, शांति और अनुशासन है, वह पूरे देश के लिए प्रेरणा है। लाखों की भीड़ में भी जिस प्रकार शांति और व्यवस्था रही, वह अनोखी है।”
विशाल प्रसाद वितरण—15 से 20 हजार श्रद्धालुओं का सैलाब
समापन के बाद दोपहर 1 बजे से प्रसाद वितरण आरंभ हुआ। जैसे ही प्रसाद वितरण का समय हुआ, पूरा परिसर भक्तों की भीड़ से लहलहा उठा। लगभग 15 से 20 हजार श्रद्धालुओं ने पंक्तिबद्ध होकर प्रसाद ग्रहण किया। महिलाओं, पुरुषों, युवा, बुजुर्ग और बच्चों—सभी में प्रसाद प्राप्त करने की अपार उत्सुकता थी।
आयोजन समिति की ओर से उत्कृष्ट व्यवस्था ने प्रसाद वितरण को पूर्णतः सुव्यवस्थित रखा। भक्तों के चेहरे पर संतोष, तृप्ति और आध्यात्मिक आनंद झलक रहा था।
श्रद्धालुओं ने बताया कि 26 वर्षों बाद देवघर में इतना विराट, सुव्यवस्थित और दिव्य आयोजन देखने को मिला है। कई भक्तों ने कहा कि यह महायज्ञ उनके जीवन का अनमोल आध्यात्मिक अनुभव रहा, जिसे वे कभी नहीं भूल पाएंगे।
रूद्र, रुद्राक्ष और श्रीसूक्त के मंत्रों से महायज्ञ बना अद्वितीय
अति रुद्र महायज्ञ में भगवान शिव की कृपा प्राप्ति एवं माता लक्ष्मी की प्रसन्नता हेतु वेद–मंत्रों की सैकड़ों विधाओं का विशेष उच्चारण किया गया।
श्रीसूक्त के मंत्रों के द्वारा प्रतिदिन विशिष्ट पायस, आज्य और जावित्रियों से अग्निहोत्र सम्पन्न हुआ। यह संपूर्ण प्रक्रिया भारतीय वैदिक परंपरा के उच्चतम स्वरूप का प्रतीक रही।
मंगल कलश यात्रा का दिव्य महत्व
पहले दिन संपन्न हुई मंगल कलश यात्रा के कलशों को पूरे कार्यक्रम में यज्ञशाला में स्थापित रखा गया और समापन दिवस पर माताएं उन्हें अपने घरों में ले गईं। मान्यता है कि ये मंगल कलश घर में समृद्धि, शांति और वैभव का आशीष लेकर प्रवेश करते हैं।
यज्ञ में रुद्र, रुद्राक्ष, शुक्ल यजुर्वेद एवं सामवेद मंत्रों द्वारा विशेष अनुष्ठान किया गया। संतों ने कहा कि यज्ञ का मूल उद्देश्य है—
“सब सुखी हों, सब निरोग रहें, राष्ट्र में समृद्धि आए, समाज में सद्भावना और शांति बनी रहे।”
महापुरुषों और ज्योतिर्लिंगों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति
कार्यक्रम में जगन्नाथ पुरी, काशी विश्वनाथ और अन्य ज्योतिर्लिंग पीठों से संत–प्रतिनिधियों का आना स्वयं में महायज्ञ की दिव्यता और महत्व को दर्शाता है। यह माना गया कि यह सम्पूर्ण आयोजन बाबा बैद्यनाथ की विशेष कृपा का प्रतिफल है।
आचार्य सुभेश श्रमण ने कहा
सनातन धर्म ही भारतीय संस्कृति का मूल है, और दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। सूर्योदय से सूर्यास्त तक सनातन धर्म प्रकृति, माता-पिता, गुरु, सभी की सेवा की प्रेरणा देता है। हमारी संस्कृति कन्या, माता और नववधू के सम्मान से शुरू होती है और यही भारतीयता तथा राष्ट्रीयता का आधार है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय धर्म सर्वोपरि है, और सनातन धर्म राष्ट्रीय धर्म का ही विस्तार है। यही हमारी संस्कृति हमें एकता, सद्भाव और कर्तव्य का संदेश देती है। जय सनातन, जय भारत, वंदे मातरम्।
संध्याकालीन कार्यक्रम में सत्यनारायण मौर्य बाबा ने तिलक, यज्ञोपवीत, शिखा और वैदिक कर्मों के महत्व पर अत्यंत प्रभावशाली काव्यात्मक प्रस्तुति दी। उनकी प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म की जड़ों से पुनः जोड़ने का अद्भुत कार्य किया।
अगले वर्ष दिल्ली में भव्य महायज्ञ की घोषणा
समापन के दौरान स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज ने घोषणा की कि
“अगले वर्ष नवंबर में दिल्ली में इसी प्रकार का विराट अति रुद्र महायज्ञ एवं ज्ञान–कथा आयोजित की जाएगी।”
उन्होंने संपूर्ण भारत से श्रद्धालुओं को इसमें सम्मिलित होने का आमंत्रण दिया।
देवघर में सम्पन्न अति रुद्र महायज्ञ न केवल धार्मिक आयोजन था, बल्कि यह आस्था, अनुशासन और लोक–कल्याण की सामूहिक चेतना का जीवंत उत्सव भी रहा। नौ दिनों तक चली इस आध्यात्मिक यात्रा ने देवघर को एक बार फिर शिव–भक्ति और सनातन परंपरा के वैश्विक केंद्र के रूप में स्थापित कर दिया।
मुख्य सलाहकार गिरधारी अग्रवाल ने कहा कि यह आयोजन बाबा बैद्यनाथ की कृपा और सभी सहयोगियों के संयुक्त प्रयास से सफल हुआ। उन्होंने सभी समर्थकों, कार्यकर्ताओं और श्रद्धालुओं के प्रति आभार व्यक्त
देवघर में आयोजित अति रुद्र महायज्ञ के सफल समापन के बाद कल शुक्रवार, 5 तारीख को शाम 3:00 बजे यज्ञ स्थल पर एक विशेष आशीर्वाद समारोह आयोजित किया गया है। इस अवसर पर प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया, सोशल मीडिया से जुड़े सभी प्रतिनिधियों के साथ-साथ आयोजन में सहयोग देने वाली संस्थाओं और सभी कार्यकर्ताओं को आमंत्रित किया गया है।
कार्यक्रम की जानकारी देते हुए स्वामी हरिहरानंद सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यह समारोह उन सभी लोगों के सम्मान और आभार के लिए रखा गया है, जिन्होंने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस महायज्ञ को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वहीं, देवी संपत मंडल ने अनुरोध किया है कि सभी मीडिया प्रतिनिधि तथा सहयोगी अवश्य उपस्थित हों और इस कार्यक्रम को सफल बनाएं।
*कार्यक्रम की सफलता में *
संयोजक प्रेम कुमार सिंघानिया, मुख्य यजमान राजेश सतनालीवाला, अध्यक्ष विनोद कुमार सुल्तानिया, महामंत्री रमेश कुमार बाजला, कोषाध्यक्ष CA गोपाल चौधरी, प्रचार–प्रसार टीम के पंकज कुमार पचेरीवाला, संजीव चोपड़ा, गज्जू भैया गजानंद, संजय कुमार बंका, बजरंग बथवाल, संजय बाजला, हरीश तोलासरिया, अक्षत सिंघानिया, प्रत्यूष सुल्तानिया, कृष्ण सुल्तानिया, अनिल टेकरीवाल, दिलीप सिंघानिया, आनंद मोदी, महेश डालमिया, सुनील अग्रवाल, सुनील भोपालपुरिया, संतोष भुवानियां, प्रमोद बाजला, अमित केसरी, शुभकरण सुल्तानिया, रेनू सिंघानिया सहित सैकड़ों महिला–पुरुषों का अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान रहा।










