तीन करोड़ की योजना, काम पूरा भी नहीं हुआ और टूटने लगा गार्डवाल

आरईओ विभाग से करीब 03 करोड़ की लागत से गार्डवाल सह पीसीसी सड़क निर्माण में बड़े पैमाने अनियमितता बरती जा रही है। सदर प्रखंड के रामचंद्रपुर गांव से खेतों के बीच ईलामी होते हुए बंगाल सीमा तक गार्डवाल सह पीसीसी सड़क निर्माण में प्राक्कलन और मानकों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। इसमें ठेकेदार की मनमानी इस कदर हावी है कि दूर-दूर तक गुणवत्ता नजर नहीं आ रहा। इसमें विभाग के जूनियर इंजीनियर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। इंजीनियर के द्वारा हालांकि गुणवत्ता और सभी मानकों को ध्यान में रखकर निर्माण कराने का दावा जरूर किया जा रहा है। लेकिन स्थल पर कोई भी आम इंसान नजारा देखकर क्वालिटी को परख सकते हैं। इतना घटिया काम शायद ही पाकुड़ जिले में कहीं हुआ होगा। जिसका नतीजा यह हुआ कि अभी काम पूरा भी नहीं हुआ और गार्डवाल टूटने लगा है। जिस गार्डवाल का निर्माण तीन से चार महीना ही हुआ होगा और जिसमें पुरजोर गुणवत्ता का दावा किया जा रहा था, आज वहीं गार्डवाल टूटने लगा है। जिससे ठेकेदार और इंजीनियर या फिर विभाग के उन तमाम अधिकारियों के सारे दावों की पोल खुलने लगी हैं, जिन्होंने ग्रामीणों के सारे शिकायतों को नजर अंदाज कर दिया। जिस दौरान गार्डवाल और सड़क निर्माण का काम शुरू हुआ था, उस वक्त घटिया निर्माण का ग्रामीणों ने जमकर विरोध किया था। तत्कालीन जूनियर इंजीनियर राकेश कुमार ने भी जांच में ग्रामीणों की शिकायतों को सही पाया था और उन्होंने घटिया निर्माण को तोड़कर दोबारा बनाने का निर्देश दिया था। उनके स्थानांतरण के बाद जब काम आगे बढ़ा, तो निर्माण कार्य में ठेकेदार की मनमानी और ज्यादा बढ़ गई। अब ग्रामीण भी थक हार कर घर बैठ गए। जिसका फायदा उठाकर ठेकेदार मनमाने तरीके से निर्माण कार्य करते चले गए। निर्माण स्थल पर बालू की जो क्वालिटी है, वह किसी भी नजरिए से इतनी बड़ी राशि से योजना के निर्माण में इस्तेमाल के लायक ही नहीं है। निर्माण स्थल पर रखा बालू बेहद ही घटिया किस्म का है। जिसका मटमैला रंग बालू की घटिया क्वालिटी को साफ दर्शाता है। जबकि जीएसबी के नाम पर भी सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। जानकारी के मुताबिक पीसीसी के नीचे 6 इंच बढ़िया क्वालिटी का जीएसबी बिछाना है। उस पर क्यूरिंग और रोलिंग के बाद ही ढलाई किया जाना है। लेकिन जीएसबी के नाम पर बेहद ही कम मात्रा में स्टोन डस्ट और कुछ हल्के मात्रा में गिट्टी मिलाकर जगह-जगह बिछा दिया जा रहा है। वहीं 8 इंच ढलाई करना है और इसमें भी सवाल उठाए जा रहे हैं। प्राक्कलन के मुताबिक ढलाई हो भी रहा है या नहीं, यह भी कहीं ना कहीं जांच का विषय है। पीसीसी ढलाई में वाइब्रेट का इस्तेमाल भी हो रहा है या नहीं, यह भी जांच का विषय बनता है। ईलामी पंचायत के मुखिया अब्दुस समद ने भी निर्माण कार्य में गुणवत्ता और मानकों पर सवाल उठाएं है। मुखिया अब्दुस समद का कहना है कि इस तरह का घटिया पीसीसी निर्माण हमने नहीं देखा। एक तरफ जीएसबी के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है और दूसरी तरफ घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेरा अनुभव बताता है कि यह पीसीसी ज्यादा दिनों तक टिकने वाली नहीं है। इस तरह मनमाने तरीके से काम करने वाले ठेकेदार के खिलाफ पहले कार्रवाई होना चाहिए। इसके साथ-साथ पूरे गुणवत्ता के साथ निर्माण कार्य को पूरा करना चाहिए। मैं विभाग से यही अनुरोध करूंगा कि अधिकारी साइड में आए और ईमानदारी तथा गहराई से जांच करें।

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