15 साल सत्ता ढूलु महतो की, अब भाई की विधायकी… फिर भी प्यासा है बागड़ा पंचायत!”

16 साल तक “सूखे नल ने सुखा दिए मन—बागड़ा की प्यास का दर्द आज भी राजनीति की धूल में पड़ा सिसक रहा है”

बाघमारा/महुदा: बागड़ा पंचायत की बहुप्रतीक्षित जलापूर्ति योजना को पुनः सुचारु रूप से चालू कराने की मांग को लेकर बागड़ा की मुखिया सावित्री कुमारी तथा बारकी बागड़ा के दर्जनों आक्रोशित ग्रामीणों का दल सोमवार को रजरप्पा स्थित गिरिडीह सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी के आवासीय कार्यालय पहुंचा। वर्षों से प्यास और उपेक्षा की मार झेल रहे ग्रामीणों ने सांसद को मांगपत्र सौंपते हुए कहा कि अब उनकी सहनशक्ति जवाब दे चुकी है और जलापूर्ति व्यवस्था तत्काल बहाल की जाए। ग्रामीणों ने बताया कि यह जलापूर्ति योजना पीएचईडी मंत्री एवं विधायक जलेश्वर महतो के कार्यकाल में तैयार कराई गई थी। योजना शुरू भी हुई, और लगभग छह माह तक गांव को पानी मिल पाया। लेकिन भीषण बाढ़ की चपेट में आने से इंटकवेल बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ गई। इसके बाद जलेश्वर महतो चुनाव हारे, और बाघमारा क्षेत्र में विधायक बदलते रहे—पहले ढूलू महतो और अब उनके बड़े भाई वर्तमान विधायक बने—परंतु 16 वर्षों का लंबा अंतराल बीत जाने के बाद भी इस योजना की सुध किसी जनप्रतिनिधि ने नहीं ली। ग्रामीणों का आरोप है कि नेता सिर्फ चुनावी मौसम में उनकी चौखट तक आते हैं, वादों का पुल बांधते हैं, और जैसे ही कुर्सी मिलती है, जनता और उनकी पीड़ा को भुला दिया जाता है। उन्होंने कहा कि पानी की समस्या ने जीवन को दूभर बना दिया है—महिलाएँ किलोमीटरों दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं, गर्मियों में हालात और भयावह हो जाते हैं, और सरकारी योजनाएँ सिर्फ कागज़ों में सिमटकर रह गई हैं। लंबे इंतज़ार, टूटती उम्मीदों और नेताओं की लगातार उपेक्षा से क्षुब्ध ग्रामीणों ने इस बार गिरिडीह सांसद से आख़िरी उम्मीद के सहारे गुहार लगाई है कि कम-से-कम वे इस योजना को पुनर्जीवित कर ग्रामीणों को राहत दिलवाएँ।

ग्रामीणों का कहना है—“हम पानी की भीख नहीं, अपना अधिकार मांग रहे हैं।”

सांसद सी.पी. चौधरी ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि जलापूर्ति संकट का समाधान प्राथमिकता पर किया जाएगा। साथ ही आज़ाद सिपाही में प्रकाशित बागड़ा–बारकी को जोड़ने वाले जौरिया पुल की समस्या संज्ञान में होने की बात कहा और चिंता जताते हुए कहा कि उन्होंने मामले का संज्ञान लेकर धनबाद उपायुक्त के साथ बैठक में पुल और सड़क निर्माण को शीघ्र मंज़ूरी देने की अनुशंसा करेंगे।

मुखिया सावित्री कुमारी ने कहा कि 22 हजार की आबादी वाली पंचायत आज भी नेताओं की उपेक्षा के कारण प्यास से जूझ रही है। जलापूर्ति योजना वर्षों से ठप है और ग्रामीणों को रोज कई किलोमीटर दूर दामोदर नदी से पानी लाना पड़ता है। 5 नवंबर 2022 को विभाग को लिखित सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि अब पूरी उम्मीद सिर्फ सांसद पर टिकी है कि वे इस संकट का समाधान कराएँगे।

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