जल का महत्व हम जितनी जल्दी समझ जाएँ हमारे लिए उतना अच्छा है और जल संरक्षण के प्रयास हमें अब शुरू करने की आवश्यकता है।

 

जल का महत्व हम जितनी जल्दी समझ जाएँ हमारे लिए उतना अच्छा है और जल संरक्षण के प्रयास हमें अब शुरू करने की आवश्यकता है।
एक तरफ धरती पर पीने लायक पानी धीरे-धीरे कम हो रहा है तो वहीं दूसरी तरफ हम किसी ना किसी कारण से जल को बर्बाद कर रहे हैं।
हमारी धरती पर 70% जल का है लेकिन मात्र 1% जल ही ऐसा है जो हम अपने उपयोग में ले सकता है, बाकी का अधिकांश जल समुद्र का खारा पानी है और बर्फ़ीला है। हमें बड़ी सोच-समझ के साथ सीमित जल का उपयोग करना चाहिए।
हमारे शरीर में लगभग 60 प्रतिशत जल होता है- मस्तिष्क में 85 प्रतिशत जल है, रक्त में 79 प्रतिशत जल है तथा फेफड़ों में लगभग 80 प्रतिशत जल होता है। क्योंकि ये हर वो इंसान को जरूरत है जो अभी इस धरती में जीवित है।
हमारी आबादी बहुत तेज़ी से बढ़ रही है जिससे जल संसाधनों पर गंभीर दवाब पैदा हो रहा है। नदी, तालाब, झील, जलाशय और भूजल के दुरुपयोग से जल की भीषण कमी का सामना आज हमें करना पड़ रहा है और शायद आने वाले वर्षों में यह संकट और अधिक बढ़ने वाला है।
आज हमें पानी को बचाने की कोशिशों में तेजी लाने की आवश्यकता है और जल संरक्षण पर गंभीर विचार करने की जरूरत है।
आज हमारे लिए जल संरक्षण महत्वपूर्ण है क्योंकि ताजा स्वच्छ जल एक सीमित संसाधन है, साथ ही बहुमूल्य भी है। जल सभी के जीवन के पोषण के लिए एक आवश्यक संपत्ति है और स्थानीय उपयोग से लेकर कृषि और उद्योग के लिए उपयुक्त सभी गतिविधियों की मूलभूत मांग है। इस प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण पर्यावरण के लिए महत्वपूर्ण है।
जल की कमी के कारण पर्यावरण का संतुलन भी बिगड़ेगा और हमारे साथ-साथ वन, उपवन, वन्य जीव आदि पर संकट आ सकता है।
नदी, तालाब, जलाशय आदि हमारे लिए पानी प्राप्ति के मुख्य स्त्रोत हैं। अतः इनकी सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य है। जल के इन संसाधनों पर सबसे बड़ा बुरा प्रभाव जल प्रदूषण डालता है। जब पानी के ये मुख्य स्त्रोत ही समाप्त हो जाएंगे तो फिर हमारे लिए पीने का पानी भी मिलना मुश्किल हो जाएगा। अतः बढ़ते जल के प्रदूषण को रोककर हमें नदियों, तालाबों और जलाशयों का रक्षण करना चाहिए।
सबसे अधिक पानी का उपयोग यदि कहीं किया जाता है तो वो है घरेलू कार्यों में। हम अपने रोज के जीवन में बड़ी मात्रा में पानी का दुरुपयोग करते हैं, क्यूंकी हम इस बात से अंजान होते हैं की यह जल सीमित मात्रा में ही धरती पर उपलब्ध है।
नहाने में, कपड़े व बर्तन धोने में, वाहनों को धोने के लिए, त्योहारों के समय, घर की साफ-सफाई के समय आदि ऐसे बहुत से कार्य हैं जिनमें हम पानी को बर्बाद करते हैं। यदि हम अपनी जवाबदारी को समझकर पानी का सदुपयोग करें तो काफी हद तक जल संरक्षण में अपना योगदान दे सकते हैं।
ऐसे बहुत से तरीके हैं जिनको अपनाकर हम जल का संरक्षण कर सकते हैं। यदि हम जल का सीमित उपयोग करें और उसे बचाने के लिए उचित कदम उठाएँ तो जल का सीमित भंडार लंबे समय तक बना रह सकता है।
भारत और दुनिया के दूसरे देशों में भी जल की भारी कमी है जिसकी वजह से आम लोगों को पीने और खाना बनाने के साथ ही रोजमर्रा के कार्यों को पूरा करने के लिये जरूरी पानी के लिये लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। जबकि दूसरी ओर, पर्याप्त जल के क्षेत्रों में अपने दैनिक जरुरतों से ज्यादा पानी लोग बर्बाद कर रहें हैं।
अगले एक दशक में70 करोड़ लोग जल की समस्या के कारण पलायन के लिए मजबूर होंगे।
हमारे देश में पानी की पूर्ति धरती से ग्रामीण क्षेत्रों में 85%, शहरी क्षेत्र में 45% और सिचाई के लिए 65% से होता है। और झारखंड की बात करे तो मात्र 12% लोगों को ही नल द्वारा जल मिलता है। जिनको मिलता है वे भी इस बात से अनजान हैं। हम सभी को जल के महत्व और भविष्य में जल की कमी से संबंधित समस्याओं को समझना चाहिये। हमें अपने जीवन में उपयोगी जल को बर्बाद और प्रदूषित नहीं करना चाहिये तथा लोगों के बीच जल संरक्षण और बचाने को बढ़ावा देना चाहिये।
धरती पर जीवन के अस्तित्व को बनाये रखने के लिये जल का संरक्षण और बचाव बहुत जरूरी होता है क्योंकि बिना जल के जीवन सभव नहीं है। पूरे ब्रह्माण्ड में एक अपवाद के रुप में धरती पर जीवन चक्र को जारी रखने में जल मदद करता है क्योंकि धरती इकलौता अकेला ऐसा ग्रह है जहाँ पानी और जीवन मौजूद है। पानी की जरुरत हमारे जीवन भर है इसलिये इसको बचाने के लिये केवल हम ही जिम्मेदार हैं।

 

रबिन्द्र गिलुवा

सचिव

आदिवासी युवा मित्र मण्डल, चक्रधरपुर

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