डॉ राजेंद्र भारती ऑल इंडिया पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन कार्यकारी परिषद के सदस्य चुने गए।

कोल्हान विश्वविद्यालय के शिक्षकों के लिए गौरवपूर्ण क्षण है – अध्यक्ष टाकू।

कोल्हान विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलानुशासक और राजनीति विज्ञान के एसोसिएट प्रोफेसर, समाज विज्ञान के पूर्व डीन, विभागाध्यक्ष, कुलसचिव और टाकू को लंबे समय तक नेतृत्व देने वाले डॉ राजेंद्र भारती को ऑल इंडिया पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन (IPSA) के कार्यकारी परिषद का सदस्य चुना गया है। 27 और 28 2025 दिसंबर को भुवनेश्वर के कलिंगा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज में आयोजित पॉलिटिकल साइंस के इंटरनेशनल कांफ्रेंस में यह चुनाव संपन्न हुआ। जिसमें सर्वसम्मति से डॉ भारती कार्यकारिणी के सदस्य चुन लिए गए। विदित हो कि ऑल इंडिया पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन पूरे भारत में समाज विज्ञान के क्षेत्र में एकेडमिक रिसर्च का एक प्रतिष्ठित संस्था है जो पॉलिटिक साइंस के क्षेत्र में शोध और सेमिनार के लिए एक बड़ा मंच उपलब्ध करता है।
टाकू के अध्यक्ष इंदल पासवान ने डॉ भारती के इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर उन्हें बधाई दिया और कहा कि यह कोल्हान विश्वविद्यालय सहित पूरे झारखंड के राजनीति विज्ञान फ्रेटरनिटी के लिए गौरव की बात है। कोल्हान विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों ने डॉ भारती के इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया और बधाई दी।
ऑल इंडिया पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन के महासचिव और कोषाध्यक्ष डॉ संजीव शर्मा ने डॉ भारती के इस उपलब्धि पर बधाई देते हुए कहा कि अब कोल्हान सहित पूरे झारखंड के राजनीति विज्ञान के क्षेत्र में शोध और सेमिनार को एक महत्वपूर्ण आयाम मिलेगा।
भुवनेश्वर में आयोजित राजनीति विज्ञान के इंटरनेशनल कांफ्रेंस में कोल्हान विश्वविद्यालय के भी कई शिक्षक इस मौके पर उपस्थित रहे जिनमें घाटशिला कॉलेज के शिक्षक और टाकू के अध्यक्ष प्रो इंदल पासवान,ग्राडुएलट कॉलेज जमशेदपुर के शिक्षक और टाकू के उपाध्यक्ष डॉ विनय कुमार सिंह, एल बी एस एम कॉलेज के शिक्षक डॉ विनय कुमार गुप्ता, टाटा कॉलेज चाईबासा के शिक्षक डॉ हरीश कुमार और जमशेदपुर विमेंस यूनिवर्सिटी की शिक्षिका डॉ सोनाली सिंह। कॉन्फ्रेंस में पूरे भारत और दूसरे देशों के लगभग 1700 शिक्षकों और शोधार्थियों ने हिस्सा लिया।
इस मौके पर डॉ विनय कुमार गुप्ता और डॉ विषय कुमार सिंह द्वारा संयुक्त रूप से प्रकाशित किताब और डॉ विनय कुमार गुप्ता द्वारा लिखित किताब का विमोचन भी किया गया।
भुवनेश्वर में आयोजित यह कॉन्फ्रेंस कोल्हान विश्वविद्यालय के लिए यादगार बन गया।

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