स्व कॉम बास्ता सोरेन की जयंती पर ब्लड डोनेशन कैंप 6 जनवरी को

घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक, पंचायत के पूर्व मुखिया, कॉमरेड शशि कुमार के शब्दों में ‘वंचितों की आवाज़’ भारतीय कम्युनिष्ट पार्टी के वयोवृद्ध कॉमरेड वास्ता सोरेन (1933-2025) ने 92 वें वर्ष की उम्र में विगत 04 जून, 2025 को दुनिया को अलविदा कहा था. शशि कुमार के अनुसार, संसदीय जनतंत्र की जो चमक है, इससे अनेक वामपंथी नेताओं में भी विचलन आया लेकिन वास्ता सोरेन कभी इस विचलन का शिकार नहीं हुए थे. वे 1962 में पहली बार तत्कालीन बिहार प्रान्त के दक्षिण में इस आदिवासी अंचल में विधायक बने. वास्ता सोरेन ने जीवन पर्यन्त वामपंथ की विचारधारा और अपने लोगों के लिए डटे रहे. उनके लिए फिक्रमंद रहे. उनकी समकालीन और बाद की पीढ़ी के सभी लोग एक स्वर में उनकी प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं. भिन्न विचारधारा वाले राजनीतिक दलों के नेता भी मानते हैं कि उन्होंने वास्ता सोरेन से बहुत कुछ सीखा. अपने दौर में कॉम. वास्ता सोरेन ने न सिर्फ सर्वहारा का नेतृत्व किया, बल्कि नये नेतृत्व की पौध भी तैयार की. वे अपने साथियों के साथ 1960 और 1970 के दशक में सक्रिय रहे और मजदूरों और आदिवासियों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया. आम जनता के शोषण के खिलाफ लड़ाई लड़ी. वे श्रेष्ठ कम्युनिष्ट नेताओं की तरह बौद्धिक और सांस्कृतिक चेतना सम्पन्न विरल नेता थे.
वरिष्ठ कॉमरेड शशि कुमार ने कहा कि कॉम. वास्ता सोरेन आदिवासियों की स्वायत्तता के हिमायती थे. उन्हें याद करने का अर्थ है कि हम उनके ख्यालात, मकसद, इरादे और सपनों को याद करें कि कैसे समाज का निर्माण होना चाहिए. वास्ता सोरेन ने हर तरह के शोषण के खिलाफ लगातार संघर्ष किया. आदिवासी, महिला, मजदूर, किसान सभी के अधिकारों और अस्तित्व के लिए लड़े.
आई.सी.सी. वर्कर्स यूनियन (एटक) के महासचिव कॉमरेड प्रकाश सिंह ने याद करते हुए कहते हैं कि इस क्षेत्र में पहले पहल मजदूरों का नेतृत्व कॉम. वास्ता सोरेन ने ही किया था. मजदूरों की समस्याओं और उनके अधिकारों के प्रति सचेत होने के साथ ही वे श्रम कानूनों के भी जानकार थे. महाजनों के शोषण के खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी. सीपीआई पार्टी से मृत्युपर्यंत वे जुड़े रहे और उनमें पार्टी के प्रति अथाह प्यार रहा. कॉम. ओम प्रकाश के अनुसार हर कोई वास्ता सोरेन नहीं हो सकता है. यह असम्भव है. वैसा समर्पण और विचारों के प्रति अडिगता मिलना अब मुश्किल है. वे जीवन भर आदिवासी, दलित, शोषितों, वंचितों, पीड़ितों और संगठन के लिए आंदोलनरत रहे. वे एक मिसाल हैं.
घाटशिला के पूर्व छात्र नेता और पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा ने अपने युवाकाल से ही कॉम. वास्ता सोरेन से हुए सम्पर्क को याद करते हुए कहते हैं कि उन्होंने वास्ता सोरेन को देखकर ही जाना कि कम्युनिष्ट कैसे होते हैं? वास्ता सोरेन एक व्यक्ति नहीं, व्यक्तित्व और नेतृत्व थे. उन्होंने सीपीआई के पुराने नेताओं को याद करते हुए कहा कि भले ही वे लोग और वह दौर नहीं रहा, लेकिन विचारधारा कभी मरती नहीं है.
कॉम. वास्ता सोरेन के साथी रहे बहरागोड़ा के पूर्व विधायक कॉम. देवी पदो उपाध्याय ने उनकी राजनीतिक समझ और सादगी के साथ उस पूरे दौर को याद करते हुए कहा कि वास्ता सोरेन आदिवासियों के प्रतिनिधि नेता थे, उनका नेतृत्वकारी व्यक्तित्व बौद्धिकता और कुशल वक्ता के गुणों से भरा था. जो सहज ही आदिवासी जनता में विश्वास का संचार करता था. कॉमरेड वास्ता सोरेन के अधूरे कामों को हमें पूरा करना है.
सामाजिक-राजनितिक कार्यकर्ता डॉ. सुनीता देवदूत सोरेन ने उन्हें एक प्रगतिशील और मार्गदर्शक व्यक्तित्व बताती हैं. उन्होंने कहा कि वास्ता सोरेन उन्हें हमेशा प्रोत्साहित करते थे और उचित-अनुचित भी समझाते थे. हालाँकि उन्होंने कभी कोई रोक-टोक नहीं की. वे खुले ख्यालों वाले व्यक्ति थे.
देश परगना बैजू मुर्मू ने उन्हें याद करते हुए कहते हैं कि उनके ही मार्गदर्शन में संथाल समाज का माझी परगना महाल बना. उन्हीं के विचारधारा को लेकर यह आज भी काम कर रहा है.
सीपीआई के सिंहभूम जिला सचिव कॉमरेड अंबुज ठाकुर ने कहा कि आज जरुर वास्ता सोरेन हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार और उनके काम, और उनके प्रभाव को जीवंत बनाये रखने का भार अब नयी पीडी के कंधों पर है. उन्होंने एक मिसाल की तरह आजीवन कम्युनिष्ट जीवन जिया. उन्होंने आने वाली पीढ़ी को सींचा.
पूर्व मजदूर नेता देबीप्रसाद मुखर्जी के अनुसार कॉमरेड वास्ता सोरेन ऐसे कम्युनिष्ट थे जो अ…

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