संघर्ष, त्याग और तपस्या से बनी है यूसीडब्ल्यूयू यूनियन : नरेश मण्डल

भुरकुंडा।यूनियन आंदोलन के गौरवशाली इतिहास को याद करते हुए मंगलवार को यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन (यूसीडब्ल्यूयू) का 88वां स्थापना दिवस भुरकुंडा कोलियरी के बांसगड़ा खदान में पिट मीटिंग के माध्यम से हर्षाेल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता सीसीएल सुरक्षा समिति सदस्य विकास कुमार ने की। इस अवसर पर यूनियन के केंद्रीय सचिव नरेश मण्डल ने अपने संबोधन में कहा कि यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन की स्थापना 4 जनवरी 1939 को गिरिडीह के बनियाडीह वेश वर्कशॉप के कामगारों द्वारा की गई थी। उन्होंने कहा कि यूसीडब्ल्यूयू आज जिस मुकाम पर है, उसके पीछे संघर्ष, त्याग और बलिदान की लंबी परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1972 में धनबाद में तीन यूनियनों के विलय से यूनाइटेड कोल वर्कर्स यूनियन का गठन हुआ। नरेश मण्डल ने कहा कि एटक त्याग, बलिदान और आंदोलन का प्रतीक रहा है। साथ ही उन्होंने चार श्रम संहिता कानूनों पर चिंता जताते हुए कहा कि इनके लागू होने से कोल इंडिया के मजदूरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। काम के घंटे 8 से बढ़कर 12-16 घंटे तक हो सकते हैं, हड़ताल की स्वतंत्रता सीमित होगी और वेतन समझौते की द्विपक्षीय प्रक्रिया प्रभावित होगी। कार्यक्रम को जेसीएससी मेंबर सह केंद्रीय सचिव नरेश मण्डल, सीसीएल सुरक्षा समिति सदस्य विकास कुमार, शाखा सचिव लखेन्द्र राय, सहायक सचिव अनुज कुमार, रंजीत कुमार, अफजल हुसैन, संतोष कुमार, शाखा कोषाध्यक्ष अशोक राम आदि ने संबोधित किया। स्थापना दिवस के अवसर पर भुरकुंडा हॉस्पिटल, परियोजना कार्यालय, सिविल विभाग, आरडब्लूएस सहित विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों एवं मजदूरों का मुंह मीठा कराकर खुशी साझा की गई। समारोह में अनुज कुमार, जोगेंद्र ठाकुर, मंज़ूर खान, प्रेम सिंह, मनोज झा, मदन मोहन ओझा, आलोक पुरखत, जगदीश, विजय यादव, दुधेश्वर महतो, प्रेम माहेश्वरी, मंगल नायक, बीरेंद्र कुमार, जाफर, दिवाकर, परदेशी, पालो, शंभु, सुनील मिश्रा, विजय साव, प्रकाश मुंडा, गोपाल करमाली, भुनेश्वर, भानु, तुलेश्वर सहित दर्जनों मजदूर शामिल हुए।

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