लेट-लतीफी में कार्रवाई: यूसिल तकनीकी निदेशक मनोज कुमार पद से हटे, सीएमडी कंचन राव को अतिरिक्त प्रभार
यूसिल के पूर्व अध्यक्ष सह प्रबंध निर्देशक डॉ संतोष सतपति के आदेशों पर लेट_ लतीफी पर नपे कंपनी के तकनीकी निर्देशक मनोज कुमार, पद से हटाए गए, यूसिल अधिकारियों में हड़कंप
कंपनी सीएमडी डॉ कंचन आनंद राव को मिला कंपनी के तकनीकी निर्देशक का
अतिरिक्त प्रभार।
मामला : यूसिल के पूर्व अध्यक्ष सह प्रबंध निर्देशक डॉ संतोष सतपति के आदेशों पर लेट_ लतीफी पर कंपनी के तकनीकी निर्देशक मनोज कुमार को उनके पद से पदमुक्त कर दिया गया।यह कार्रवाई यूसिल को नियंत्रण करने वाली संस्था परमाणु ऊर्जा विभाग ,मुम्बई ने तकनीकी निर्देशक मनोज कुमार पर लगे आरोपों की जांचों उपरांत यह कार्रवाई की है। डीएई की इस कार्रवाई के बाद यूसिल अधिकारियों में हड़कंप मच गया हैं। इस सिलसिले में यूसिल के पूर्व सीएमडी श्री सतपति ने उनके आदेशों की अवहेलना व अनदेखी करने की शिकायत डीए ई से की थी। ।इस बाबत पूछे जाने पर यूसिल के तकनीकी निर्देशक मनोज कुमार ने घटना की पुष्टि करते है कहा है कि विभाग से आगे जो जिम्मेदारी मिलेगी उसे संभालेंगे । यह सब कंपनी के पूर्व सी एम डी डॉ संतोष सतपति का खेल है।
बीते 30 अप्रैल 2024 को यूसिल की तकनीकी निर्देशक बने थे मनोज कुमार
जादूगोड़ा : यूसिल के तकनीकी निर्देशक मनोज कुमार। खान प्रबंधक के पद से यूसिल में अपने कैरियर की शुरुआत की थी व अपने लंबे कैरियर के कई उतार _ चढ़ाव के बाद बीते 30 अप्रैल 2024 को लोक उद्यम चयन बोर्ड में साक्षात्कार के बाद उन्हें यूसिल का तकनीकी निर्देशक के पद पर नियुक्ति की गई थी। 20 महीने तकनीकी निर्देशक पर अपनी सेवा के बाद आज उन्हें पदमुक्त कर दिया गया। यूसिल के 70 साल के इतिहास में पहली बार किसी तकनीकी स्तर के अधिकारी पर वरीय अधिकारियों के आदेशों की अनदेखी पर बड़ी कार्रवाई की गई है।
यूसिल की महिला अधिकारी द्वारा उनपर लगाए गए झूठे आरोपों से आहत हुं /डॉक्टर संतोष सतपति
जादूगोड़ा : यूसिल के पूर्व अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ संतोष कुमार सतपति ने कहा कि अपनी सेवा काल के अंतिम क्षणों में उनपर एक कंपनी की महिला अधिकारी द्वारा प्रताड़ना की झूठी रिपोर्ट से मै आहत हु।यूसिल को आगे ले जाने के लिया बीते जून 2025 मे 18 कंपनी अधिकारियों को तबादला किया गया था। इसी तबादले के आहत लोगों ने बाद में एक साजिश के तहत उन पर कॉर्पोरेट हमला किया गया ।इस हमले में कई वरीय अधिकारी शामिल थे। जिसके तहत उनपर महिला प्रताड़ना की झूठी रिपोर्ट जादूगोड़ा थाने में दर्ज करा दी गई। यह सब एक षड्यंत्र का हिस्सा था।










