भागवत कथा से सुंदर और सार्थक समय कहीं और नहीं: पूज्य नागार्च जी ​स्टीलगेट दुर्गा मंदिर में ‘हर के आँगन में हरि कथा’ के छठे दिन उमड़ी भीड़, श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह पर झूमे श्रद्धालु

​धनबाद।कोयलांचल के सरायढेला स्थित स्टीलगेट दुर्गा एवं शिव मंदिर प्रांगण इन दिनों पूरी तरह भक्ति और आध्यात्म के रंग में रंगा है। यहाँ आयोजित सात दिवसीय भव्य श्रीमद्भागवत कथा ‘हर के आँगन में हरि कथा’ के छठे दिन बुधवार को श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। वृंदावन से पधारे प्रख्यात कथा व्यास पूज्य श्री हित ललितवल्लभ नागार्च जी ने अपनी सुमधुर वाणी से ज्ञान की गंगा बहाई।

​सत्संग से ऊँचे होते हैं विचार

कथा व्यास श्री नागार्च जी ने कहा कि जिस जीव का मन एक बार भागवत कथा में लग जाता है, उसे समय के बीतने का पता ही नहीं चलता। उन्होंने जोर देकर कहा, “प्रभु के भजन और कथा श्रवण से सुंदर और सार्थक समय दुनिया में कहीं और नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि सत्संग ही वह माध्यम है जो समाज में श्रेष्ठ लोगों का मेल-मिलाप कराता है। कथा में वही शामिल होता है, जिसके विचार उच्च कोटि के होते हैं, लेकिन प्रभु इतने दयालु हैं कि यदि कोई बिना किसी भाव के भी कथा में आ जाए, तो भगवान उसे भी अपनी शरण में ले लेते हैं।

​महारास और रुक्मणी विवाह ने मोहा मन

छठे दिन की कथा के दौरान महारास लीला, मथुरा गमन, कंस वध और उद्धव-गोपी संवाद के प्रसंगों का सजीव वर्णन किया गया। जैसे ही श्रीकृष्ण-रुक्मणी मंगल विवाह का प्रसंग शुरू हुआ, पूरा पंडाल ‘राधे-राधे’ के जयघोष से गूँज उठा। आकर्षक झांकियों को देख श्रद्धालु भावविभोर होकर नृत्य करने लगे।

​संतों की वाणी ही सही मार्ग

अध्यात्म का मर्म समझाते हुए नागार्च जी ने कहा कि कभी-कभी इंद्र जैसे देवता भी भगवान को नहीं पहचान पाते। ऐसे में भगवान और संतों तक पहुँचने का एकमात्र मार्ग संतों की वाणियों का आश्रय लेना ही है।

​अंतिम दिन उमड़ेगी भारी भीड़

मंदिर समिति के सदस्यों ने बताया कि 19 तारीख को सुदामा चरित्र, उद्धव संवाद और श्री शुकदेव पूजन का आयोजन होगा।

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