पेसा नियमावली को लेकर आदिवासी संगठनों ने उग्र विरोध, समाहरणालय गेट पर सरकार व क्षेत्रीय विधायकों का पुतला दहन किया

लातेहार।लातेहार माननीय झारखण्ड उच्च न्यायालय ने 29 जुलाई 2024 को अपने ऐतिहासिक फैसले में झारखण्ड के अनुसूचित क्षेत्रों में लागू झारखण्ड पंचायत राज अधिनियम 2001 (JPRA) को संसदीय अधिनियम पंचायती राज (Extension to the Scheduled Areas) Act, 1996 (PESA/PPESA 1996) के विपरीत और असंगत ठहराया था। न्यायालय ने राज्य सरकार को दो माह के भीतर पेसा 1996 के अनुरूप नियमावली बनाकर लागू करने का स्पष्ट परमादेश दिया था।
लेकिन निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा नियमावली नहीं बनाए जाने पर आदिवासी बुद्धिजीवी मंच ने 9 दिसंबर 2024 को झारखण्ड सरकार के पाँच वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के खिलाफ न्यायालय अवमानना अधिनियम 1971 के तहत मामला दायर किया। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों पर न्यायालय अवमानना स्थापित होने की स्थिति बनी।
दबाव के बाद झारखण्ड सरकार ने 23 दिसंबर 2025 को पेसा को पारित किया तथा 2 जनवरी 2026 को पेसा कानून की अधिसूचना जारी की। हालांकि आदिवासी संगठनों का आरोप है कि सरकार ने JPRA 2001 की धारा 3 के तहत पेसा नियमों का विस्तार कर दिया, जो कि मूल संसदीय अधिनियम पेसा 1996 के प्रतिकूल है। संगठनों का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में सामान्य पंचायत एवं नगरपालिका व्यवस्था पर संवैधानिक रोक है, इसके बावजूद सरकार जबरन व्यवस्था थोपकर आदिवासियों और मूलवासियों के संसाधनों की लूट का रास्ता खोलना चाहती है।
आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था से जुड़े लोगों ने आरोप लगाया कि सरकार की पेसा नियमावली में ग्राम सभा को कमजोर कर उपायुक्त-केंद्रित व्यवस्था बना दी गई है, जो पेसा की मूल भावना के खिलाफ है। इसी कारण इन नियमों को सिरे से खारिज किया जाता है और संसदीय अधिनियम पेसा 1996 के अनुरूप स्वतंत्र नियमावली बनाने की मांग की जाती है।इन्हीं मांगों को लेकर सोमवार को लातेहार समाहरणालय गेट के सामने झारखण्ड सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, पंचायत राज विभाग की मंत्री दीपिका सिंह पाण्डेय, वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों, मनिका विधायक रामचंद्र सिंह तथा लातेहार विधायक प्रकाश राम के प्रतीकात्मक पुतले का दहन किया गया।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि राज्य सरकार ने पेसा 1996 के अनुरूप नियमावली लागू नहीं की, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

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