पांच महीने से मजदूरी लंबित: उत्पाद विभाग के टेंडर में भुगतान विवाद, डीसी से लगाई न्याय की गुहार

जामताड़ा जिला इन दिनों उत्पाद विभाग के अंतर्गत जारी टेंडर से जुड़े भुगतान विवाद को लेकर चर्चा में है। निजी एजेंसी के माध्यम से बहाल किए गए दर्जनों कर्मियों को पिछले पांच महीनों से उनकी पूरी मजदूरी नहीं मिल पाई है। कर्मियों का आरोप है कि वे एक से दो महीने तक लगातार ड्यूटी करते रहे, लेकिन उन्हें केवल एक माह का भुगतान किया गया, जबकि शेष राशि बीते पांच महीनों से लंबित है। इस कारण कई कर्मी गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं और उनमें भारी आक्रोश व्याप्त है।

अपनी समस्या के समाधान को लेकर पीड़ित कर्मियों का एक प्रतिनिधिमंडल उपायुक्त रवि आनंद से मिला और उन्हें ज्ञापन सौंपा। कर्मियों ने बताया कि वे लगातार संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई थी। इसी दौरान भाजपा नेत्री बबीता झा भी मौके पर मौजूद रहीं और उन्होंने पीड़ित कर्मियों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि मजदूरी रोकना न केवल अमानवीय है, बल्कि श्रम कानूनों का भी स्पष्ट उल्लंघन है।

बबीता झा ने बताया कि जब उन्होंने इस विषय में उत्पाद अधीक्षक से बात की, तो अधीक्षक ने स्पष्ट किया कि टेंडर लेने वाले ठेकेदार ही भुगतान के लिए पूरी तरह जिम्मेदार हैं। विभागीय प्रक्रिया में कर्मियों का भुगतान रोके जाने का कोई औचित्य नहीं है और ठेकेदार को शीघ्र बकाया राशि का भुगतान करना चाहिए।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उपायुक्त रवि आनंद ने भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन इस पर त्वरित कार्रवाई करेगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि दस दिनों के भीतर बकाया मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित कराया जाएगा। उपायुक्त के इस आश्वासन के बाद लंबे समय से परेशान कर्मियों में उम्मीद की किरण जगी है।

यह मामला न केवल उत्पाद विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा करता है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन अपने वादे को कितनी जल्दी अमल में लाता है और प्रभावित कर्मियों को उनका हक कब तक मिल पाता है।

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