पहाड़िया बच्चों में छिपी है रचनात्मक प्रतिभा: एसडीओ

पाकुड़।आदम पहाड़िया जनजाति बच्चों में जबरदस्त प्रतिभा छिपी हुई है। इसकी झलक पाकुड़ जिले के सुदूर इलाके में स्थित बोन पोखरिया गांव के कार्यक्रम में देखने को मिली जब छोटे-छोटे पहाड़िया बच्चों ने कलम और कूची से आर्ट पेपर पर सुंदर-सुंदर चित्र उकेरे। प्रकृति और पर्यावरण विषय पर आधारित चित्र प्रतियोगिता में करीब 100 बच्चे शामिल हुए जिन्होंने जल-जंगल, पशु, पक्षी समेत अन्या कई चित्र बनाए। बच्चों ने अंग्रेजी में कई गीत भी गाए। कार्यक्रम का आयोजन पशुपतिनाथ सनातन- संस्कृति सेवा संस्थान, कौशल्या ज्योति, माधव- आशा सेवा संस्थान और केएन मेमोरियल ट्रस्ट जैसी संस्थाओं ने मिलकर किया था। कार्यक्रम का विषय था बोन पोखरिया के आंगन में चित्रांकन व शिक्षण सामग्री तथा कंबल वितरण समारोह। आयोजन का उद्देश्य था आदिम पहाड़िया जनजाति के बच्चों का सर्वांगीण विकास और प्रतिभा को उभारना।
इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद पाकुड़ के अनुमंडल अधिकारी साइमन मरांडी ने चित्र बनाने वाले बच्चों को पुरस्कृत किया। उन्होंने बच्चों की प्रतिभा की तारीफ की और कहा कि पहाड़िया बच्चों में रचनात्मक प्रतिभा छिपी हुई है। जरूरत है उन्हें उभारने की। इसके लिए बच्चों को पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध करानी होगी। जिसके लिए सरकार के साथ-साथ समाज के लोगों को भी मिलजुल कर प्रयास करना होगा। सामाजिक संस्थाओं को भी मदद करनी होगी। उन्होंने कहा कि परहित सरसी धर्म नहीं भाई। एसडीओ ने कहा कि झारखंड की सरकार और पाकुड़ जिला प्रशासन कमजोर और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए तत्परता से काम कर रहा है।
फादर सोलेमान, प्रणव जी, दीपक जी, सिस्टर एंटोनी, सिस्टर सिल्वा रानी ने भी बच्चों को संबोधित किया। बच्चों को संस्थाओं की ओर से कंबल, जैकेट, कपड़े, कॉपी कलम आदि सामान दिए गए। इस मौके पर सोलेमान ने बच्चों की पढ़ाई से संबंधित कुछ समस्याओं की ओर लोगों का ध्यान आकृष्ट किया।

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