जय धरती मां फाउंडेशन के के कृषि शोध सेंटर,सोनदाहा राजगंज में सिंदूर की खेती देखने बहुत से लोग आते हैं और यहां से शुद्ध प्राकृतिक सिंदूर फलां देखते हैं. ये सिंदूर प्राकृतिक है इसलिए इससे त्वचा संबंधी किसी भी बीमारी के होने का डर नहीं रहता है.”
इतने सालों में लगते हैं पौधों में फल-फूल
कृषि शोधकर्ता रवि कुमार निषाद ने बताया कि सिंदूर के पौधे का औषधीय महत्व भी है. जिसका वैज्ञानिक नाम बिक्सा ओरेलाना है. कई लोग इसे सिंदूरी कपिला के नाम से भी जानते हैं. सुहागिन महिलाओं के साथ-साथ सिंदूर का पूजा-पाठ में भी विशेष महत्व होता है. ऐसे में सिंदूर की गुणवत्ता का ख्याल रखना बहुत जरूरी है. उन्होंने बताया कि ये पौधा औसत ऊंचाई का होता है. इसे धनबाद जिले के सभी किसानों के परती पड़े मैदानी इलाकों में आसानी से उगाया जा सकता है. इसको लगाने के तीन साल बाद पौधे में फल और फूल आना शुरू हो जाते हैं.
हमारी संस्था जय धरती मां फाउंडेशन
के सुधीर हेमब्रम, रंजीत कुमार, सहदेव महतो,मो शमशेर अली,राम मल्लाह, पप्पू निषाद,अकाश कुमार,अनु मुर्मू में बहुत ही हर्षोल्लास है।
झारखंड की गाथा लिखने वाले महान पितामह श्री विनोद बिहारी महतो जी के पौपोत्र श्री राहुल महतो जी ने रवि कुमार निषाद के प्रयासों की सराहना की और अन्य किसानों को भी इससे जोड़ने का आह्वान किया. श्री राहुल महतो , “रवि कुमार निषाद ने एक बहुत ही बड़ा प्रयास किया है. जिसमें प्राकृतिक तौर पर सिंदूर सहित अनेक उत्पाद तैयार किए हैं, जो कि पुरे झारखंड के किसानों के लिए भी एक प्रेरणा है.”
हमारे महान पितामह श्री विनोद बिहारी महतो जी हमेशा बोलते थे की गांवों में कृषि क्रांति की जरूरत है हमारी झारखंड की मिट्टी में अशिम ताकत है
आज वही कथन आज सत्य होते देख रहा हूं हमारे किसानों के मार्गदर्शन बन चुके रवि कुमार निषाद ।
आज जय धरती मां फाउंडेशन धनबाद के कार्य धरातलीय स्तर पर दिख रही है चाहे वो कृषि क्षेत्र में, पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा जागरूकता अभियान, स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता अभियान हो।










