कल्याण विभाग में हुई 12 करोड़ 38 लाख की फर्जीवाड़ा केश का सीआईडी ने किया टेक ओवर
पाकुड़। कल्याण विभाग में हुई हेरा फेरी कर 12 करोड़ 38 लाख 66,000 की निकासी मामले में दर्ज केस अब सीआईडी जांच करेगी। सीआईडी ने इस केश को टेक ओवर कर लिया है। हालांकि इस मामले को पाकुड़ पुलिस जांच कर रही थी। लेकिन केस की गंभीरता को देखते हुए इस केस को सीआईडी के हाथ में सौंप दी गई है। अब देखना है की सीआईडी इस मामले की कितनी रफ्तार से जांच कर इस फर्जी वारा को अंजाम देने वालों तक पहुंच कर उन्हें गिरफ्त में लेती है। यह वक्त ही बताएगा। ऐसी चर्चा है कि यह फर्जीवाड़ा का खेल तत्कालीन जिला कल्याण पदाधिकारी रहे श्री राम के समय से कुछ मिडिलमैन किस्म के लोग की मिली भगत से अंजाम दिया जा रहा है। अगर 2011 से 2016 के बीच में हुई कल्याण विभाग के निकासी मामले की गहराई से जांच की जाए तो उसे वक्त से ही फर्जी निकासी का मामला सामने आ सकता है। इधर इस मामले में सामाजिक कार्यकर्ता सुरेश अग्रवाल ने परिवर्तन निदेशालय की निदेशक को पत्र लिखकर पूरे मामले की तह तक जांच कराने की का अनुरोध किया है। निदेशक को भेजे गए पत्र में श्री अग्रवाल ने कल्याण विभाग में हुई वित्तीय घोटाले को प्रथम दृष्टया में मनी लांड्रिंग, आपराधिक षड्यंत्र, फर्जी दस्तावेज एवं सरकारी धन के गबन के आरोप की ओर स्पष्ट संकेत करने की बात कही है।
पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी के कार्यकाल में भी हुई 2 करोड़ 85 लाख की निकासी
कल्याण विभाग में पदस्थापित रहे पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी लक्ष्मण हरिजन के कार्यकाल में भी 27 एडवाइस के जरिए 2 करोड़ 85 लाख की फर्जी निकासी की जानकारी मिली है। हालांकि पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी ने इस निकासी के संबंध में अपने स्तर से जांच पड़ताल कर वर्तमान जिला कल्याण पदाधिकारी को लिखित रूप में अवगत कराया है। उनके द्वारा दी गई लिखित जानकारी को इस मामले में दर्ज केस के अनुसंधानकर्ता को वर्तमान जिला कल्याण पदाधिकारी ने उपलब्ध करा दी है। इस मामले में वर्तमान जिला कल्याण पदाधिकारी ने बताया कि मेरे कार्यकाल में 74 एडवाइस के जरिए रुपए की निकासी हुई और पूर्व जिला कल्याण पदाधिकारी के कार्यकाल में 27 एडवाइस के द्वारा 2 करोड़ 85 लाख की निकासी हुई है। कहीं न कहीं निकासी के मामले में पूरी तरह से बैंक के लोगों की संलिप्तता रही है। निश्चित रूप से अगर इस मामले की गहराई से पुलिस जांच करें तो इस फर्जी निकासी में जो भी बैंक कर्मी शामिल रहे हैं उनका नाम का पर्दाफाश हो जाएगा।
शाह इंटरप्राइजेज के नाम हुई सबसे अधिक निकासी
कल्याण विभाग में अबतक की जांच में 15 करोड़ से अधिक हुई फर्जी निकासी में साह इंटरप्राइजेज के नाम में बैंक से उनके खाते में पैसा भेजी गई है जो जांच का विषय है। हालांकि बैंक ने फिलवक्त सभी के खाते को फ्रिज कर दिया है।
कार्यालय अधीक्षक मानवेंद्र कार्यालय से आखिर क्यों है फरार ?
जिला कल्याण कार्यालय के कार्यालय अधीक्षक रहे मानवेंद्र पर रुपए निकासी मामले में केस दर्ज होने के बाद पुलिस उनसे दो दिनों तक पूछताछ की। पूछताछ के बाद उन्हें छोड़े जाने के बाद से वे ऑफिस आना बंद कर दिया है। माना जा रहा है कि वे यहां से फरार हो गए है। उनके कार्यालय में ताला लटका दिख रहा है। चर्चा है कि मानवेंद्र ने अपने सगे सगे संबंधियों के नाम पर फर्जीवाड़ा कर पैसे की निकासी की। इसमें उन्हें बैंक का भी सहयोग मिला , इसे फर्जी निकासी मामले में एक धर्मनाथ नाम का व्यक्ति जो अक्सर कार्यालय में आया करता था। उसके द्वारा भी इस फर्जी निकासी को अंजाम देने में महत्वपूर्ण भूमिका होने की चर्चा है। हालांकि पुलिसिया जांच में जिन लोगों पर केस दर्ज हुआ है उसके अलावा कई ऐसे लोग हैं जो इसे पूरे फर्जीवाड़ा में उनकी संलिप्त सामने आई है। जांच में कई नए नाम में भी सामने आ गए जो इस फर्जीवाड़ा में शामिल रहे है।










